14 साल की बच्‍ची ने बना दी हवा से चलने वाली बाइक

girl air bicycle

भारत सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पेट्रोल डीजल पर खर्च होता है। काफी समय से कीमतें गिरने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पेट्रोलियम के दाम दोबारा बढ़ रहे हैं। कीमतों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर मोदी सरकार के चेहरे पर शिकन पैदा कर दी है। ओपेक देशों की ओर से कीमतें बढ़ाने के बाद सरकार को भविष्य में पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने पड़ेंगे या फिर पेट्रोलियम कीमतों को थामने के लिए सब्सिडी देनी पड़ेगी। सरकार अगर सब्सिडी देती है तो इसका असर खजाने पर पड़ेगा और राजकोषीय घाटा बढ़ सकता जो सरकार के लिए दूसरी चिंता का सबब होगा।

 


सरकार की इस चिंता का हल ओडिशा की 14 साल की प्रियदर्शिनी के एक आविष्कार से दूर हो सकता है।
– तेजस्विनी ने एक ऐसी बाइक का आविष्कार किया है, जो पेट्रोल-डीजल नहीं बल्कि हवा से चलती है।
तेजस्विनी के इस मॉडल को साइंस पर काम करने वाली देश के कई संस्थाएं भी मान्यता दे चुकी हैं। आइए जानते हैं क्या है तेजस्विनी का पूरा आविष्कार और इससे देश को क्या फायदा हो सकता है….

कौन हैं प्रियदर्शिनी 14 वर्षीय प्रियदर्शिनी मूल तौर पर उड़ीसा के राउरकेला की रहने वाली हैं। वह जगदा स्थित एक स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ाई करती हैं। भुवनेश्वर में आयोजित विज्ञान मेले के बाद उनका चयन ईस्टर्न इंडिया विज्ञान मेले कोलकाता के लिए चयन हुआ। इसके बाद राजस्थान में हुए ऑल इंडिया विज्ञान मेले में भी उनके मॉडल को मान्यता मिली।

ट्रीय मार्केट में पेट्रोलियम के दाम दोबारा बढ़ रहे हैं। कीमतों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर मोदी सरकार के चेहरे पर शिकन पैदा कर दी है। ओपेक देशों की ओर से कीमतें बढ़ाने के बाद सरकार को भविष्‍य में पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने पड़ेंगे या फिर पेट्रोलियम कीमतों को थामने के लिए सब्सिडी देनी पड़ेगी। सरकार अगर सब्सिडी देती है तो इसका असर खजाने पर पड़ेगा और राजकोषीय घाटा बढ़ सकता जो सरकार के लिए दूसरी चिंता का सबब होगा। ओडिशा की इस लड़की का आवष्किार दूर कर सकता है संकट 14 वर्षीय प्रियदर्शिनी मूल तौर पर उड़ीसा के राउरकेला की रहने वाली हैं।

– वह जगदा स्थित एक स्‍कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ाई करती हैं।

भुवनेश्वर में आयोजित विज्ञान मेले के बाद उनका चयन ईस्टर्न इंडिया विज्ञान मेले कोलकाता के लिए चयन हुआ।
इसके बाद राजस्थान में हुए ऑल इंडिया विज्ञान मेले में भी उनके मॉडल को मान्यता मिली।
प्रियदर्शिनी को अन्य बच्चों की ही तरह हर रोज साइकिल से स्कूल जाना पड़ता था।

तेजस्विनी को पहली बार इसका विचार तब आया, जब वो साइकल रिपेयर की दुकान पर गई थी।
– उसने देखा कि कैसे मैकेनिक साधारण-सी एयर गन का इस्तेमाल कर साइकल के टायरों की गांठें सुलझाते हैं।
उसने सोचा कि अगर एयर गन यह काम कर सकती है तो इससे साइकल भी चल सकती है।

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प्रियदर्शिनी को मिला पिता का साथ
प्रियदर्शिनी के दिमाग में आइडिया तो था, लेकिन उसे पता था कि वह अकेले यह काम नहीं कर सकती है।
इसलिए वह अपने पिता के पास गई। पिता नटवर गोच्चायट ने बेटी को प्रेरित किया और जरूरी सामान दिलवाया।
आखिर में वह सफल हुई और अब तेजस्विनी को सिर्फ नॉब खोलनी होती है और उसकी यह बाइक हवा से बातें करने लगती है।

कैसे काम करती है प्रियदर्शिनी की बाइक

ऐसे काम करती है प्रियदर्शिनी की बाइक
बाइक में एक सिलेंडल लगा होता है। सिलेंडर से होकर हवा पैडल के पास लगी एयर गन तक जाती है।
वहां यह हवा गिअर को छह अलग-अलग ब्लेड्स की सहायता से रोटेट करने लगती है।
इस तरह साइकल चलने लगती है।
साइकल में एक स्टार्टिंग नॉब है और साथ ही एक सेफ्टी वॉल्व भी है जो अतिरिक्त एयर रिलीज करती है।

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आविष्कार से पॉल्यूशन और पेट्रोलियम खर्च दोनों बच सकता है
– उसके इनोवेशन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि दुनिया भर के लीडर्स कोयला, ऑइल, गैस, पेट्रोल और डीजल के उपयोग में कटौती के लिए प्रयास कर रहे हैं।
यहीं नहीं खुद मोदी सरकार ने भी 2030 तक पेट्रोलियम इम्‍पोर्ट को आधा करने का प्‍लान बनाया है।
इस टेक्‍नोलॉजी को कार और मोटरसाइकिल में यूज करके पहुत सारा पेट्रोल डीजल बनाया जा सकता है।
देश में सबसे ज्;यादा पेट्रोलियम कार और मोटरसाइकिल चलाने के लिए ही होता है।

1 किलो हवा में 6 किमी चलती है
प्रियदर्शिनी बताती हैं कि उनकी साइकिल 10 किलो हवा की मदद से 60 किलोमीटर जाती है।
मतलब एक किलो हवा के साथ 6 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है।
प्रियदर्शिनी के मुताबिक, उनकी यह टेक्निक मोटर साइकिल और कारों में भी यूज हो सकती है
साथ ही इससे पर्यावरण को भी किसी तरह का नुकसान नहीं होगा।
किसी कंपनी ने नहीं किया अप्रोच
हालांकि प्रयदर्शिनी के इस कॉन्सेप्ट की चर्चा बस मीडिया में ही हुई है।
अभी तक किसी कंपनी की तरफ से अप्रोच नहीं किया गया है।

साथ ही प्रियदर्शिनी ने अपने इस मॉडल का किसी तरह का पेटेंट नहीं कराया है।

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